प्रिण्ट

घोषणा-पत्र के सातवे भाग पर ग़ौर करते हुए, मैं अपने चित्रों के प्रिण्ट अब और नहीं बेच रहा।

जहाँ तक उस आर्थिक व्यवस्था की बात है जिसे मैंने पहले प्रस्तुत किया था, वह जो जाॅन रस्किन के लेखों से प्रभावित थी, पीछे मुड़के देखा जाए तो वह असफ़ल मालूम होगी, सांसारिक तौर से, हालाँकि आध्यात्मिक तौर पर काफ़ी सरहाई गई। हाँ, पर अगर सच बोला जाए, तो मेरी खुद की ओर से भी उसे सफ़ल बनाने की कोशिश हलकी-फुलकी ही रही।

फिर भी, अगर मेरे चित्रों की काॅपियों की बहुत इच्छा हो, तो, ज़रूर, मेरे से सम्पर्क करने में हिचकें नहीं।

लेखक-मज़दूर